संकल्प सृजन बहुआयामी सामाजिक न्यास की स्थापना 16 दिसंबर 2018 को हुआ। विधिवत् निबंधन 20 सितंबर 2019 को भारतीय संविधान के धारा 1860/ए सोसाइटी रजिस्ट्रेशध एक्ट के तहत संपन्न हुआ। संस्था का मुख्यालय वर्तमान में झारखंड प्रांत के बोकारो जिला है। बोकारो जिला में दो समितियाँ गतिमान है; बोकारो जिला समिति एवं बोकारो नगर समिति। इसी के साथ ही प्रांतीय कार्यकारिणि पदाधिकारियों की एक समिति है जिसमें दोनो ही समिति से दो दो पदाधिकारी सहित 11सदस्यीय समिति गठित है जो प्रांत स्तरीय कार्य गतिमान करने हेतु प्रयास रत हैं/रहेंगे।
संकल्प सृजन नाम के अनुसार ही नव सृजन हेतु संकल्पित बहुउद्देशीय न्यास समाज व राष्ट्र के नव निर्माण हेतु कटिबद्ध है और समाज के सहयोग से ही समाज के विकास को प्राथमिकता देते हुए गतिमान है। समाज में एक सेतु की भूमिका निभाने वाली यह संस्था सभ्रांत परिवारो से अभिवंचित वर्ग को सीधा जोडते हुए समरसता व समदर्शी भाव से उत्थान का कार्य करती है। किसी भी प्रकार के भेद-भाव रहित यह संस्था किसी भी जाति समुदाय के अभिवंचित,शोषित,पीडित व पिछडे जनो के हित एवं उन्हें मुख्यधारा से जोडने हेतु हर संभव प्रयास करते हुए समरस समाज की स्थापना करना एक मात्र उद्देश्य है।
संकल्प सृजन के कार्य बाल,किशोर,युवा,प्रौढ,बुजूर्ग महिला/पुरुष सभी के लिए है। प्रत्येक वह वर्ग.जो उपेक्षित या दिशाविहीन हो रहे वर्ग का मार्गदर्शन करने के साथ सहयोग देते हुए अनैतिक प्रवृतियों व प्रभावो से मुक्त कराकर व्यक्तित्व विकास या निर्माण कराना कर्तव्य है। सेवा को उपकार नहीं अपितु दायित्व मानते हुए संबद्ध कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से सदैव सेवारूपी महायज्ञ में स्व आहुत हेतु तत्पर रहते हैं।
शिशु सृजन वाटिका की संरचना का एक मुख्य उद्देश्य यह हे कि कल खडे होने वाले कदमों व कंधों को अपने सभ्यता,संस्कृति, संस्कारों व नैतिक परंपराओं के परिवेश में गढना। इस सृजन केंद्र में विशेष नियम व निर्देश के अनुसार 4वर्ष से 11वर्ष तक के 30बच्चे,एक शिक्षक/शिक्षिका होते हैं। यहाँ अध्ययनरत सारे बच्चे एक ही मोहल्ले से होते हैं,और इस प्रकार के केंद्र अभिवंचित बस्तियों में संचालित होते हैं।
किशोर उम्र यानी 12-19 आयुवर्ग के बच्चों का साप्ताहिक सृजन शिविर के साथ ही त्रैमासिक व्यक्तित्व विकास शिविर के माध्यम से सही-गलत समझ विकसित कराते हुए उनकी निर्णायक क्षमता का विकास करना। शिशु सृजन वाटिका की तरह किशोर/किशोरी केंद्र का संचालन भी अभिवंचित बस्तियों में की जाती है, त्रैमासिक शिविरों में अन्य वर्ग के किशोर भी बुलाए जाते हैं। अत: एक सफल,सजग व सृजक युवा गढने में हमारे केंद्र वरदान साबित होते हैं।
इस आयाम के तहत तरुण बालक/बालिकाओं को अपने जेब खर्च से कटौती कर बचत की आदत बनाई जाती है। आपस में 15-20 लड़की या लड़का (अलग अलग समूह) का एक समूह बनाते हैं। एक निर्धारित राशि होती है जिसे प्रत्येक सप्ताह निश्चित दिन को निर्धारित समय पर एक जगह एकत्र होकर सभी अपने अपने पैसे जमा करते हैं। इन जमा पैसों से उस समूह के सदस्य ही लाभान्वित हो सकते हैं। विषम काल में अपने पढाई लिखाई या फॉर्म भरना आदि खर्चे हेतु यहाँ से सहयोग प्राप्त कर अपना काम कर सकते हैं।
इस आयाम के तहत महिलाएँ समूह के माध्यम से बचत तो करती ही है साथ ही स्वरोजगार हेतु अपने कदम बढाती हैं। सरकार भी आज समुहों के माध्यम से अनेक प्रकार के कार्य संचालित कराकर उन्हें सशक्त कर रही। इन सबके अलावे घर की चारदिवारी से बाहर की दुनिया, समाज के प्रति अपना भी दायित्व, कर्तव्यबोध के साथ देश दुनिया की समझ विकसित कर अज्ञानता के अँधेरे से ज्ञान प्रकाश की ओर कदम बढाने के साथ ही सामुहिक रहने व निर्णय करने की क्षमता का विकास होता है। निरक्षर को अक्षरज्ञान कराना,बैंकीय कार्यप्रणाली से परिचय कराना सहयोग की भावना विकसित करने के साथ ही आत्मविश्वास को बढावा देने का यह सटीक माध्यम होता है।
अध्यक्ष संकल्प सृजन
महासचिव
उप-कोषाध्यक्ष